श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.9.1 
গৌর-নিধি কপট সন্ন্যাসী-বেশ-ধারী
অখিল-ভুবন-অধিকারী
गौर-निधि कपट सन्न्यासी-वेश-धारी
अखिल-भुवन-अधिकारी
 
 
अनुवाद
समस्त ब्रह्माण्ड के स्वामी गौर की जय हो, जिन्होंने संन्यासी का वेश धारण किया था।
 
Glory to Gaura, the lord of the entire universe, who assumed the guise of a monk.
तात्पर्य
श्री गौरसुंदर चौदहों लोकों के भगवान हैं। इस संसार के लोगों को शिक्षा देने के लिए, उसने सभी प्रकार के सांसारिक सुख छोड़ दिए और एक त्यागी की पोशाक स्वीकार करके एक इंसान होने की योग्यता को प्रदर्शित किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)