श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  2.8.98 
শঙ্করের গুণ শুনিঽ প্রভু বিশ্বম্ভর
হৈলাশঙ্কর-মূর্তি দিব্য-জটা-ধর
शङ्करेर गुण शुनिऽ प्रभु विश्वम्भर
हैलाशङ्कर-मूर्ति दिव्य-जटा-धर
 
 
अनुवाद
भगवान विश्वम्भर ने जब भगवान शंकर के गुणों के बारे में सुना, तो उन्होंने तुरन्त जटाओं सहित शंकर का रूप धारण कर लिया।
 
When Lord Vishvambhar heard about the qualities of Lord Shankar, he immediately assumed the form of Shankar with matted hair.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)