श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.8.97 
আইল করিতে ভিক্ষা প্রভুর মন্দিরে
গাহযে শিবের গীত, বেডিঽ নৃত্য করে
आइल करिते भिक्षा प्रभुर मन्दिरे
गाहये शिवेर गीत, वेडिऽ नृत्य करे
 
 
अनुवाद
वह भिक्षा मांगने के लिए भगवान के द्वार पर आया और भगवान शिव के बारे में गीत गाते हुए एक चक्र में नृत्य करने लगा।
 
He came to the Lord's door to beg for alms and started dancing in a circle singing songs about Lord Shiva.
तात्पर्य
वह वृत में नाचा और शिव की स्तुति में गीत गाया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)