कभी-कभी भगवान प्रह्लाद की भावना से प्रार्थना करते थे। इस प्रकार भगवान निरंतर भक्ति के सागर में तैरते रहते थे।
Sometimes the Lord would pray in the spirit of Prahlada. Thus, the Lord would constantly float in the ocean of devotion.
तात्पर्य
कभी-कभी वह प्रह्लाद जी की तरह भक्ति के उपदेशक के रूप में कार्य करते थे और प्रार्थनाएँ करते थे। भगवान ने भक्ति की समुद्र में भिन्न-भिन्न प्रकार से तैरने के विलास को प्रदर्शित करने के लिए एक आश्रित, या समर्पित, आत्मा के भाव को सिखाया। ऐसा करके, उन्होंने प्रदर्शित किया कि आश्रित अलग किए गए भाग कभी भी परम आश्रय नहीं बन सकते।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥