कुछ दिन तो वे गोपी भाव से रोते रहते थे और उन्हें याद ही नहीं रहता था कि दिन है या रात।
For some days he would cry like a Gopi and he would not remember whether it was day or night.
तात्पर्य
कभी-कभी, सखियों को दर्शन कराने के लिए अपने गोपी-भाव के लक्षण दिखाते हुए, ब्रजवास के दास्य प्रधान भक्तों के समक्ष, जो दाम्पत्य अनुराग की आड़ में थे, भगवान ने रात-दिन को भूलकर अपनी बाह्य ज्ञानेन्द्रियों की शक्तियों का लोप कर दिया। इस तरह भगवान ने विरह के ब्रजलीला का दर्शन कराया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥