भगवान के चरणकमलों में भौंरों के समान स्थित भक्तों ने अपने-अपने सौभाग्य के अनुसार भगवान के मत्स्य, कूर्म, वराह, वामन और नरसिंह रूपों के दर्शन किये।
The devotees, situated like bees at the Lord's lotus feet, saw the Lord's Matsya, Kurma, Varaha, Vamana and Narasimha forms according to their respective good fortune.
तात्पर्य
भक्तों की सेवा में उनकी योग्यता के अनुसार, भगवान् ने अपने विभिन्न नैमित्तिक, या सामयिक रूपों का प्रदर्शन किया, जैसे- मत्स्य, कूर्म, वामन, नारसिंहा और राम, जिनकी पूजा विस्मय और श्रद्धा के साथ की जाती है और जो सनातन वैकुण्ठ में निवास करते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोग विष्णु के विभिन्न रूपों को देखने के बाद भेदभाव न करें और उन्हें अलग-अलग देवता न मानें, भगवान् ने अपने भक्तों की अनुकूल रुचि के अनुसार अपने शाश्वत रूपों का प्रदर्शन किया। लोगों को उन लोगों के चंगुल से मुक्त करने के लिए जो भगवान् की पूजा को त्याग देते हैं, जो धन, प्रसिद्धि और स्त्रियों की इच्छा रखते हैं, जो भगवान् के अस्थायी रूपों की रचना करते हैं, और अपनी भौतिक इच्छाओं को पूरा करने का घमंड करते हैं, भगवान् ने इस भौतिक दुनिया में अपने शाश्वत रूपों को प्रकट करने के मनोरंजन का प्रदर्शन किया। समस्त अवतारों के स्रोत, श्रीमान महाप्रभु द्वारा उन शाश्वत लीलाओं का प्रदर्शन ने उनके शाश्वत सेवकों को अभिभूत कर दिया और उनके परम लक्ष्य के रूप में प्रकट हुई।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥