vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
»
श्लोक 86
श्लोक
2.8.86
নিত্যানন্দ-স্বরূপের বাল্য নিরন্তর
সর্ব-ভাবে আবেশিত প্রভু-বিশ্বম্ভর
नित्यानन्द-स्वरूपेर बाल्य निरन्तर
सर्व-भावे आवेशित प्रभु-विश्वम्भर
अनुवाद
नित्यानंद स्वरूप सदैव बालक की भाव-भंगिमाओं में लीन रहते थे, और भगवान विश्वम्भर भी विभिन्न भावों में लीन रहते थे।
Nityananda Swarup was always absorbed in the expressions of the child, and Lord Visvambhara was also absorbed in various expressions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×