श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.8.86 
নিত্যানন্দ-স্বরূপের বাল্য নিরন্তর
সর্ব-ভাবে আবেশিত প্রভু-বিশ্বম্ভর
नित्यानन्द-स्वरूपेर बाल्य निरन्तर
सर्व-भावे आवेशित प्रभु-विश्वम्भर
 
 
अनुवाद
नित्यानंद स्वरूप सदैव बालक की भाव-भंगिमाओं में लीन रहते थे, और भगवान विश्वम्भर भी विभिन्न भावों में लीन रहते थे।
 
Nityananda Swarup was always absorbed in the expressions of the child, and Lord Visvambhara was also absorbed in various expressions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)