श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.8.84 
ক্ষণে যায গঙ্গাদাস-মুরারির ঘরে
আচার্যরত্নের ক্ষণে চলেন মন্দিরে
क्षणे याय गङ्गादास-मुरारिर घरे
आचार्यरत्नेर क्षणे चलेन मन्दिरे
 
 
अनुवाद
कभी भगवान गंगादास या मुरारी के घर जाते थे, और कभी वे आचार्यरत्न के घर जाते थे।
 
Sometimes Bhagavan would go to Gangadasa's or Murari's house, and sometimes he would go to Acharyaratna's house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)