श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  2.8.83 
নিরন্তর সবার মন্দিরে প্রভু যায
চতুর্-ভুজ-ষড্-ভুজাদি বিগ্রহ দেখায
निरन्तर सबार मन्दिरे प्रभु याय
चतुर्-भुज-षड्-भुजादि विग्रह देखाय
 
 
अनुवाद
भगवान नियमित रूप से अपने भक्तों के घर जाते थे और उन्हें अपने विभिन्न रूप जैसे चतुर्भुज और छःभुज रूप दिखाते थे।
 
The Lord regularly visited the homes of his devotees and showed them his various forms such as the four-armed and six-armed forms.
तात्पर्य
महाप्रभु ने अपने चतुर्भुज नारायण रूप जो शंख, चक्र, गदा और कमल धारण करते हैं, कई भाग्यशाली व्यक्तियों को दिखाया और उन्होंने कुछ अन्य लोगों को अपना षष्ठ भुजा रूप दिखाया। नृसिंहदेव के दो हाथ, राम के दो हाथ और कृष्ण के दो हाथों का संयोजन षट्-भुजा कहलाता है। नृसिंहदेव का दाहिना हाथ भक्त-वात्सल्य अर्थात भक्तों के लिए स्नेह को प्रदर्शित करता है, उनके बाएँ हाथ के नाखून ईर्ष्यालु व्यक्तियों के दिलों को चीर देते हैं, रामचंद्र के दो हाथों में धनुष और बाण भौतिकवादियों के नाम और यश को नष्ट करते हैं, और कृष्ण के दो हाथों में बाँसुरी प्रेम से भरे भक्तों को अपनी ओर खींचती है। श्री गौरासुंदर ने इन तीन लीलाओं को प्रदर्शित करने के लिए अपने षष्ठ भुजा रूप का प्रदर्शन किया। कभी-कभी यह भी कहा जाता है कि प्रभु के छह हाथ धन, प्रसिद्धि और भौतिक सुख की चाहतों को नष्ट कर देते हैं। हम राम के हाथों में धनुष और बाण, कृष्ण के हाथों में बाँसुरी और श्री चैतन्यदेव के हाथों में डंडा और जल पात्र देखते हैं। राम के दो हाथ लंका के सोने [या धन] को नष्ट करते हैं, बांसुरी धारण करने वाले व्रजेंद्र-नंदन के दो हाथ मोह के कामदेव [या भौतिक भोग] को नष्ट करते हैं और दो हाथ [चैतन्यदेव के] स्त्रियों के संग के आनंद की प्रसिद्धि की इच्छा को नष्ट करते हैं। उन विभिन्न दर्शनों को नष्ट करने के लिए जो इस संसार में झूठे तर्क और अवरोध उत्पन्न करते हैं और जिन्होंने परम सत्य के मार्ग पर न चलने वाले लोगों को भक्ति सेवा से दूर कर दिया है, प्रभु ने उन लोगों को दंडित किया है जो एक हाथ में डंडा धारण करके इस तरह के अवरोधों से अभिभूत होते हैं, और उन्होंने उन लोगों के छल को मिटा दिया जो अपने दूसरे हाथ में जल पात्र धारण करके भौतिक प्रसिद्धि की इच्छा करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)