श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.8.72 
মহা দীর্ঘ-শ্বাস ছাডে, কম্প সর্ব-গায
প্রেমে পরিপূর্ণ হৈলা, কিছু নাহি ভায
महा दीर्घ-श्वास छाडे, कम्प सर्व-गाय
प्रेमे परिपूर्ण हैला, किछु नाहि भाय
 
 
अनुवाद
उसकी साँसें तेज़ हो गईं और उसका पूरा शरीर काँप उठा। वह आनंद से भर गई और उसके दिमाग़ में कुछ और नहीं सूझा।
 
Her breathing quickened, and her whole body trembled. She was filled with bliss, and nothing else came to mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)