श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.8.71 
বাহ্য পাইঽ আই, আথে-ব্যথে কেশ বান্ধে
না বলযে কিছু আই গৃহ-মধ্যে কান্দে
बाह्य पाइऽ आइ, आथे-व्यथे केश बान्धे
ना बलये किछु आइ गृह-मध्ये कान्दे
 
 
अनुवाद
होश में आते ही माँ शची ने जल्दी से अपने बाल बाँध लिए। वह एक कमरे में जाकर रोती रहीं और कुछ नहीं बोलीं।
 
As soon as she regained consciousness, Mother Shachi quickly tied her hair back. She went into a room and continued crying, saying nothing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)