श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.8.7 
আপনে তুলিযা হাতে ভাত নাহি খায
পুত্র-প্রায করিঽ অন্ন মালিনী যোগায
आपने तुलिया हाते भात नाहि खाय
पुत्र-प्राय करिऽ अन्न मालिनी योगाय
 
 
अनुवाद
वे अपने हाथों से चावल नहीं खाते थे, इसलिए मालिनी ने उन्हें अपने पुत्र के समान भोजन कराया।
 
He did not eat rice with his hands, so Malini fed him like her own son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)