इस पद की पहली पंक्ति इंगित करती है कि उसने श्री लक्ष्मीदेवी को श्री कृष्ण के सीने पर देखा। पद्म पुराण में कहा गया है: "श्री कृष्ण की सुंदरता को देखने के बाद, श्री लक्ष्मीदेवी उनके प्रति आकर्षित हो गई और उन्होंने तपस्या करना शुरू कर दिया। फिर भगवान कृष्ण ने उनसे पूछा, 'तुम किस कारण से तपस्या कर रही हो?' लक्ष्मी ने उत्तर दिया, 'मैं एक गोपी का रूप लेना चाहती हूं और वृंदावन में आपके साथ रहना चाहती हूं।' भगवान कृष्ण ने कहा, 'वह बहुत ही कम प्राप्त होता है।' लक्ष्मी ने फिर कहा, 'हे मेरे प्रभु, मैं आपके सीने पर सुनहरी रेखाओं के रूप में रहना चाहती हूं।' भगवान कृष्ण ने तब कहा, 'ऐसा ही हो।'" तब से लक्ष्मी सुनहरी रेखाओं के रूप में भगवान कृष्ण के सीने पर ही रहीं।
