श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.8.58 
হাসিযা বসিলা এক-ঠাঙি দুই-জন
গদাধর-আদি আর পরমাপ্ত-গণ
हासिया वसिला एक-ठाङि दुइ-जन
गदाधर-आदि आर परमाप्त-गण
 
 
अनुवाद
वे दोनों मुस्कुराये और साथ में बैठ गये, उनके साथ गदाधर जैसे अंतरंग साथी भी थे।
 
They both smiled and sat together, accompanied by intimate companions like Gadadhara.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)