श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.8.50 
হাসে লক্ষ্মী জগন্-মাতা স্বামীর বচনে
অন্তরে থাকিযা সব স্বপ্ন-কথাশুনে
हासे लक्ष्मी जगन्-माता स्वामीर वचने
अन्तरे थाकिया सब स्वप्न-कथाशुने
 
 
अनुवाद
अपने पति की बातें सुनकर जगतजननी विष्णुप्रिया देवी मुस्कुराईं। उन्होंने स्वप्न का पूरा वर्णन दूसरे कमरे में सुना था।
 
Hearing her husband's words, the mother of the universe, Vishnupriya Devi, smiled. She had heard the entire description of the dream in the other room.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)