श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.8.5 
অদ্বৈত লৈযা সর্ব বৈষ্ণব-মণ্ডল
মহা-নৃত্য-গীত করে কৃষ্ণ-কোলাহল
अद्वैत लैया सर्व वैष्णव-मण्डल
महा-नृत्य-गीत करे कृष्ण-कोलाहल
 
 
अनुवाद
सभी भक्तगण अद्वैत के साथ हर्षोल्लासपूर्वक नृत्य कर रहे थे और कृष्ण के नामों का उच्च स्वर में जप कर रहे थे।
 
All the devotees were dancing joyfully with Advaita and chanting the names of Krishna loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)