श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.8.49 
তোমার বধূরে মোর সন্দেহ আছিল
আজি সে আমার মনে সন্দেহ ঘুচিল”
तोमार वधूरे मोर सन्देह आछिल
आजि से आमार मने सन्देह घुचिल”
 
 
अनुवाद
“मुझे आपकी बहू के बारे में कुछ संदेह था, लेकिन आज वह संदेह दूर हो गया।”
 
“I had some doubts about your daughter-in-law, but today those doubts have been cleared.”
तात्पर्य
जब श्री गौरासुंदर विष्णुप्रिया देवी द्वारा बनाये हुए भोजन की भेंट करते थे, तो प्रायः देखते थे कि आधे से अधिक भोग का देवताओं द्वारा सेवन कर लिया जाता था। इसलिये महाप्रभु कहते थे, "मुझे मन में शंका होती थी कि तुम्हारी पुत्रवधु विष्णुप्रिया-देवी खा लेती है। पर आज तुम्हारा स्वप्न सुनकर मैं दृढ़ रूप से जान गया कि अधिकांश भोग तो स्वयं देवताओं द्वारा खाया जाता है और थोड़ा-बहुत बचा रह जाता है हमारे लिये।" घर के अंदर एक दूसरे कमरे में विश्वमाता विष्णुप्रिया देवी श्रीमान महाप्रभु के ये वचन सुनकर मुस्कुराईं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)