श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.8.4 
হেন-মতে নবদ্বীপে শ্রী-গৌরাঙ্গ-রায
নিত্যানন্দ-সঙ্গে রঙ্গ করযে সদায
हेन-मते नवद्वीपे श्री-गौराङ्ग-राय
नित्यानन्द-सङ्गे रङ्ग करये सदाय
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री गौरांग राय ने नवद्वीप में नित्यानंद के साथ विभिन्न लीलाओं का निरंतर आनंद लिया।
 
Thus Sri Gauranga Raya continuously enjoyed various pastimes with Nityananda at Navadvipa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)