श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 325
 
 
श्लोक  2.8.325 
এ সকল পুণ্য-কথা যে করে শ্রবণ
ভক্ত-সঙ্গে গৌরচন্দ্রে রহু তাঽর মন
ए सकल पुण्य-कथा ये करे श्रवण
भक्त-सङ्गे गौरचन्द्रे रहु ताऽर मन
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इन शुभ विषयों को सुनता है, उसका मन सदैव श्री गौरचन्द्र के चरणकमलों में तथा भक्तों से घिरा रहता है।
 
The person who listens to these auspicious topics, his mind always remains at the lotus feet of Sri Gaurchandra and surrounded by devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)