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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
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श्लोक 323
श्लोक
2.8.323
সর্ব-গণে উঠিল আনন্দ-কোলাহল
না জানি কে কোন্-দিগে হৈল বিহ্বল
सर्व-गणे उठिल आनन्द-कोलाहल
ना जानि के कोन्-दिगे हैल विह्वल
अनुवाद
वे सब आनंद से भरी एक ज़ोरदार आवाज़ में चिल्ला उठे। इतने अभिभूत थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वे कहाँ हैं।
They all cried out in a loud voice filled with joy. They were so overwhelmed that they did not even know where they were.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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