| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन » श्लोक 317 |
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| | | | श्लोक 2.8.317  | প্রভুর চরিত্র দেখিঽ হাসে ভক্ত-গণ
সবাই বলেন,—“অবতীর্ণ নারাযণ” | प्रभुर चरित्र देखिऽ हासे भक्त-गण
सबाइ बलेन,—“अवतीर्ण नारायण” | | | | | | अनुवाद | | भगवान के स्वरूप को देखकर भक्त मुस्कुरा उठे और बोले, "भगवान नारायण प्रकट हुए हैं।" | | | | Seeing the form of the Lord, the devotee smiled and said, "Lord Narayana has appeared." | | ✨ ai-generated | | |
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