श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 316
 
 
श्लोक  2.8.316 
লখিতে না পারে কেহ, হেন মাযা করে
ভৃত্য বিনা তাঙ্র তত্ত্ব কে বুঝিতে পারে
लखिते ना पारे केह, हेन माया करे
भृत्य विना ताङ्र तत्त्व के बुझिते पारे
 
 
अनुवाद
उनकी माया इतनी प्रबल थी कि उन्हें कोई पहचान नहीं सकता था। उनके सेवकों के अतिरिक्त अन्य कोई भी उन्हें यथार्थतः समझ नहीं सकता था।
 
His illusion was so powerful that no one could recognize him. No one except his servants could truly understand him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)