श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 315
 
 
श्लोक  2.8.315 
গলা ধরিঽ কান্দে সব-বৈষ্ণব দেখিযাস
বারে সম্ভাষে ঽভাইঽ, ঽবান্ধবঽ বলিযা
गला धरिऽ कान्दे सब-वैष्णव देखियास
बारे सम्भाषे ऽभाइऽ, ऽबान्धवऽ बलिया
 
 
अनुवाद
प्रभु ने भक्तों के कंधों पर हाथ रखा और रो पड़े। उन्होंने उनमें से प्रत्येक को "भाई" और "मित्र" कहकर संबोधित किया।
 
The Lord placed his hands on the devotees' shoulders and wept. He addressed each of them as "brother" and "friend."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)