श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 314
 
 
श्लोक  2.8.314 
বাহ্য প্রকাশিযা পুনঃ করযে ক্রন্দন
দাস্য-ভাব প্রকাশ করযে অনুক্ষণ
बाह्य प्रकाशिया पुनः करये क्रन्दन
दास्य-भाव प्रकाश करये अनुक्षण
 
 
अनुवाद
अपनी चेतना वापस आते ही भगवान रोने लगे। फिर वे सेवक की तरह लगातार रोते रहे।
 
As soon as he regained consciousness, the Lord began to cry. Then, like a servant, he continued to cry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)