श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 306
 
 
श्लोक  2.8.306 
নিত্যানন্দ মহাপ্রভু-শিরে ধরে ছাতি
যোড-করে অদ্বৈত সম্মুখে করে স্তুতি
नित्यानन्द महाप्रभु-शिरे धरे छाति
योड-करे अद्वैत सम्मुखे करे स्तुति
 
 
अनुवाद
नित्यानंद ने महाप्रभु के सिर पर छत्र धारण किया और अद्वैत ने भगवान के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना की।
 
Nityananda held the umbrella over Mahaprabhu's head and Advaita prayed with folded hands before the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)