श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 305
 
 
श्लोक  2.8.305 
মহা-শাস্তি-কর্তা-হেন ভক্ত-সব দেখে
হেন শক্তি নাহি কারো, হৈবে সম্মুখে
महा-शास्ति-कर्ता-हेन भक्त-सब देखे
हेन शक्ति नाहि कारो, हैबे सम्मुखे
 
 
अनुवाद
सभी भक्त उन्हें परम दंड देने वाले के रूप में देखते थे। उनमें उनके सामने खड़े होने की शक्ति नहीं थी।
 
All devotees saw him as the ultimate punisher. They lacked the strength to stand up to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)