श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 304
 
 
श्लोक  2.8.304 
কিছুই না বলে কেহ, মৌন করিঽ বসে
সকল ভক্তের চিত্তে লাগযে তরাসে
किछुइ ना बले केह, मौन करिऽ वसे
सकल भक्तेर चित्ते लागये तरासे
 
 
अनुवाद
भक्तों ने कुछ भी नहीं कहा, बल्कि चुपचाप बैठ गए, क्योंकि उनके हृदय आश्चर्य से भर गए थे।
 
The devotees said nothing, but sat quietly, for their hearts were filled with wonder.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)