vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
»
श्लोक 303
श्लोक
2.8.303
দুই চক্ষু পাকাইযা করযে হুঙ্কার
ঽনাডা নাডা নাডাঽ প্রভু বলে বার-বার
दुइ चक्षु पाकाइया करये हुङ्कार
ऽनाडा नाडा नाडाऽ प्रभु बले बार-बार
अनुवाद
भगवान ने अपनी आँखें घुमाईं और जोर से गरजे और बार-बार पुकारे, “नादा! नादा! नादा!”
The Lord rolled his eyes and roared loudly and repeatedly called out, "Nada! Nada! Nada!"
तात्पर्य
महाप्रभु ने आँखें घुमाते हुये जोर से पुकारा, "नाडा! नाडा!"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×