श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 303
 
 
श्लोक  2.8.303 
দুই চক্ষু পাকাইযা করযে হুঙ্কার
ঽনাডা নাডা নাডাঽ প্রভু বলে বার-বার
दुइ चक्षु पाकाइया करये हुङ्कार
ऽनाडा नाडा नाडाऽ प्रभु बले बार-बार
 
 
अनुवाद
भगवान ने अपनी आँखें घुमाईं और जोर से गरजे और बार-बार पुकारे, “नादा! नादा! नादा!”
 
The Lord rolled his eyes and roared loudly and repeatedly called out, "Nada! Nada! Nada!"
तात्पर्य
महाप्रभु ने आँखें घुमाते हुये जोर से पुकारा, "नाडा! नाडा!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)