श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 302
 
 
श्लोक  2.8.302 
হরিষে তাম্বূল যোগাযেন সর্ব-দাসে
হস্ত পাতিঽ লয প্রভু সবা চাহি হাসে
हरिषे ताम्बूल योगायेन सर्व-दासे
हस्त पातिऽ लय प्रभु सबा चाहि हासे
 
 
अनुवाद
सभी सेवकों ने प्रसन्नतापूर्वक सुपारी चढ़ाई और भगवान ने मुस्कुराते हुए उसे अपने हाथ से स्वीकार किया।
 
All the servants happily offered betel nuts and the Lord smilingly accepted it with his own hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)