श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 299
 
 
श्लोक  2.8.299 
প্রভু বলে,—“ক্ষুদ্র নহে ভক্ত উপহার
ঝাট আন, ঝাট আন, কি আছযে আর”
प्रभु बले,—“क्षुद्र नहे भक्त उपहार
झाट आन, झाट आन, कि आछये आर”
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "भक्त का प्रसाद तुच्छ नहीं है, इसलिए जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे शीघ्रता से ले आओ।"
 
The Lord said, "The offerings of a devotee are not trivial, so bring quickly whatever you have."
तात्पर्य
श्रीमद भागवत (10.81.3) में बताया गया है कि:

अण्वाप्य उपाहृतं भक्तैः

प्रेम्णा भूर्य एव मे भवेत्

"मैं अपने भक्तों द्वारा शुद्ध प्रेम से दिया गया सबसे छोटा उपहार भी महान मानता हूं।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)