श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 281
 
 
श्लोक  2.8.281 
এই মতে নাচে মহাপ্রভু বিশ্বম্ভর
নিশি অবশেষ মাত্র সে এক প্রহর
एइ मते नाचे महाप्रभु विश्वम्भर
निशि अवशेष मात्र से एक प्रहर
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विश्वम्भर महाप्रभु रात्रि के केवल तीन प्रहर शेष रहने तक नृत्य करते रहे।
 
In this way, Vishvambhar Mahaprabhu continued dancing until only three watches of the night remained.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)