श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 280
 
 
श्लोक  2.8.280 
এই-মত অচিন্ত্য কৃষ্ণের পরকাশ
ইহা জানে ভাগ্যবন্ত চৈতন্যের দাস
एइ-मत अचिन्त्य कृष्णेर परकाश
इहा जाने भाग्यवन्त चैतन्येर दास
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कृष्ण अकल्पनीय लीलाएँ प्रकट करते हैं, जो केवल भगवान चैतन्य के भाग्यशाली सेवकों को ही ज्ञात होती हैं।
 
Thus Krishna manifests unimaginable pastimes, which are known only to the fortunate servants of Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)