श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 278
 
 
श्लोक  2.8.278 
বত্সরেক নাম মাত্র কত যুগ গেল
চৈতন্য-আনন্দে কেহ কিছু না জানিল
वत्सरेक नाम मात्र कत युग गेल
चैतन्य-आनन्दे केह किछु ना जानिल
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य के साथ रहने के आनंद के कारण कई युग एक वर्ष के समान बीत गए, जिसे कोई समझ नहीं पाया।
 
Many ages passed like a year because of the bliss of being with Lord Chaitanya, which no one could understand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)