श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 277
 
 
श्लोक  2.8.277 
অহর্-নিশ ভক্তি-সঙ্গে নাচে বিশ্বম্ভর
শ্রান্তি নাহি কারো, সবে সত্ত্ব-কলেবর
अहर्-निश भक्ति-सङ्गे नाचे विश्वम्भर
श्रान्ति नाहि कारो, सबे सत्त्व-कलेवर
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर भक्तों के साथ दिन-रात नृत्य करते रहे। कोई भी थका नहीं, क्योंकि सभी के पास आध्यात्मिक शरीर थे।
 
Vishvambhara danced day and night with his devotees. No one got tired, because they all had spiritual bodies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)