श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 270
 
 
श्लोक  2.8.270 
মহা-মহা-ভট্টাচার্য সহস্র যেথায
হেন ঢাঙ্গাইত-গুলা বসে নদীযায
महा-महा-भट्टाचार्य सहस्र येथाय
हेन ढाङ्गाइत-गुला वसे नदीयाय
 
 
अनुवाद
“नदिया में हजारों महान भट्टाचार्य हैं, फिर भी ऐसे ढोंगी भी यहां रहते हैं।
 
“There are thousands of great Bhattacharyas in Nadia, yet such hypocrites also live here.
तात्पर्य
नादिआ में आज, जहाँ हज़ारों विद्वान ब्राह्मण निवास करते हैं, वहीं कुछ धोखेबाज़ और ढोंगी प्रबल हो गए हैं।

अर्थ-शब्द "ढाँगाईता" (या ढाँगाटी) का अर्थ है "एक धोखेबाज़," "एक धोखेबाज," "एक भ्रष्टाचारी," या "एक चोर।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)