श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.8.27 
বাল্য-ভাবে নিত্যানন্দ আইর চরণ
ধরিবারে যায, আই করে পলাযন
बाल्य-भावे नित्यानन्द आइर चरण
धरिबारे याय, आइ करे पलायन
 
 
अनुवाद
बालक के समान भाव में नित्यानंद ने माता शची के पैर पकड़ने का प्रयास किया, किन्तु वह भाग गईं।
 
Nityananda, in a childlike manner, tried to hold the feet of Mother Shachi, but she ran away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)