श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 268
 
 
श्लोक  2.8.268 
দর্দুরী উঠিযা আছে শ্রীবাসের বাডী
দুর্গোত্সবে যেন সাডি দেই হুডাহুডি
दर्दुरी उठिया आछे श्रीवासेर बाडी
दुर्गोत्सवे येन साडि देइ हुडाहुडि
 
 
अनुवाद
“यह मेंढकों की कर्कश ध्वनि या श्रीवास के घर में दुर्गा-पूजा उत्सव के जंगली उत्सव जैसा लगता है।
 
“It sounds like the croaking of frogs or the wild celebration of the Durga-puja festival at the Srivas home.
तात्पर्य
"ऐसा लगता है कि श्रीवास के घर में मेंढक टर्रा रहे हैं। वे उत्साहित और शोरगुल मचा रहे हैं, जैसे दुर्गा-पूजा के त्यौहार के दौरान लोग एक-दूसरे को धकेलते और टकराते हैं।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)