श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 257
 
 
श्लोक  2.8.257 
কেহ বলে,—“কোন্ কার্য পরেরে চর্চিযাচল
সবে ঘর যাই, কি কার্য দেখিযা”
केह बले,—“कोन् कार्य परेरे चर्चियाचल
सबे घर याइ, कि कार्य देखिया”
 
 
अनुवाद
किसी और ने कहा, "दूसरों की आलोचना करने से क्या फ़ायदा? चलो घर चलते हैं। देखने से क्या फ़ायदा?"
 
Someone else said, "What's the point in criticizing others? Let's go home. What's the point in watching?"
तात्पर्य
किसी ने कहा, "दूसरों के विषय में चर्चा करने से कुछ लाभ नहीं है। आइए, हम अपना कर्तव्य करें।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)