श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 255
 
 
श्लोक  2.8.255 
কেহ বলে,—“আত্ম বিনা সাক্ষাত্ করিযা
ডাকিলে কি কার্য হয, না জানিল ইহা
केह बले,—“आत्म विना साक्षात् करिया
डाकिले कि कार्य हय, ना जानिल इहा
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, "उन्होंने आत्मा का साक्षात्कार नहीं किया है। वे नहीं जानते कि उनकी ऊँची पुकार से क्या परिणाम निकलेगा।"
 
Someone said, “They have not experienced the Spirit. They do not know what will come of their high calling.”
तात्पर्य
किसी ने कहा, ''स्वयं को साक्षात किए बिना किसी के केवल '' कृष्ण, कृष्ण '' पुकारने से क्या लाभ होगा?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)