vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
»
श्लोक 254
श्लोक
2.8.254
পরম সুবুদ্ধি ছিল নিমাই পণ্ডিত
এ গুলার সঙ্গে তার হেন হৈল চিত”
परम सुबुद्धि छिल निमाइ पण्डित
ए गुलार सङ्गे तार हेन हैल चित”
अनुवाद
"पहले निमाई पंडित बहुत बुद्धिमान थे। अब इन लोगों की संगति से उनकी बुद्धि बदल गई है।"
"Earlier Nimai Pandit was very intelligent. Now his intelligence has changed due to the association of these people."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×