श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 254
 
 
श्लोक  2.8.254 
পরম সুবুদ্ধি ছিল নিমাই পণ্ডিত
এ গুলার সঙ্গে তার হেন হৈল চিত”
परम सुबुद्धि छिल निमाइ पण्डित
ए गुलार सङ्गे तार हेन हैल चित”
 
 
अनुवाद
"पहले निमाई पंडित बहुत बुद्धिमान थे। अब इन लोगों की संगति से उनकी बुद्धि बदल गई है।"
 
"Earlier Nimai Pandit was very intelligent. Now his intelligence has changed due to the association of these people."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)