श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 251
 
 
श्लोक  2.8.251 
কেহ বলে,—“ব্রাহ্মণের নহে নৃত্য-ধর্ম
পডিযাও এ-গুলা করযে হেন কর্ম”
केह बले,—“ब्राह्मणेर नहे नृत्य-धर्म
पडियाओ ए-गुला करये हेन कर्म”
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, "ब्राह्मणों के लिए नृत्य करना उचित नहीं है। शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद भी वे ऐसे कार्यों में क्यों संलग्न होते हैं?"
 
Someone said, "It is not proper for Brahmins to dance. Why do they engage in such activities even after studying the scriptures?"
तात्पर्य
उन भगवान हरि के विरोधी अनासक्तों में एक अभिमानी पंडित ने कहा, "शास्त्रों का अध्ययन करने वाले के लिए नृत्य करना कर्तव्य नहीं है। यह निम्न वर्ग के लोगों का काम है। यह खेदजनक है कि धर्मग्रंथों के अध्ययन के बाद भी उन्होंने ब्राह्मण समुदाय में निम्न श्रेणी का पेशा पेश किया है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)