श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 249
 
 
श्लोक  2.8.249 
কোথা হৈতে আসিঽ নিত্যানন্দ অবধূত
শ্রীবাসের ঘরে থাকিঽ করে এত-রূপ”
कोथा हैते आसिऽ नित्यानन्द अवधूत
श्रीवासेर घरे थाकिऽ करे एत-रूप”
 
 
अनुवाद
"हम नहीं जानते कि ये नित्यानंद अवधूत कहाँ से आए हैं। ये श्रीवास के घर पर रहते हैं और ये सारे नाटक करते हैं।"
 
"We don't know where this Nityananda Avadhuta has come from. He lives at Srivas's house and does all these dramas."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)