श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 247
 
 
श्लोक  2.8.247 
দেবে হরিলেক বৃষ্টি, জানিহ নিশ্চয
ধান্য মরিঽ গেল কডি উত্পন্ন না হয
देवे हरिलेक वृष्टि, जानिह निश्चय
धान्य मरिऽ गेल कडि उत्पन्न ना हय
 
 
अनुवाद
“यह निश्चित जान लो कि उनके कारण देवता वर्षा नहीं कर रहे हैं, धान के खेत सूख गए हैं, और कोई भी धन नहीं कमा पा रहा है।
 
“Know for sure that because of them the gods are not sending rain, the paddy fields have dried up, and no one is able to earn money.
तात्पर्य
उनके षडयंत्र के कारण, देवता भोजन उत्पादन के लिए पर्याप्त वर्षा नहीं करा रहे हैं और परिणामस्वरूप, धान के खेत सूख गए हैं। इसलिए, पूरे देश पर अभाव और गरीबी का प्रकोप हो गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)