श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 246
 
 
श्लोक  2.8.246 
যে না ছিল রাজ্য-দেশে, আনিযা কীর্তন
দুর্ভিক্ষ হৈল—সব গেল চিরন্তন
ये ना छिल राज्य-देशे, आनिया कीर्तन
दुर्भिक्ष हैल—सब गेल चिरन्तन
 
 
अनुवाद
“इस राज्य में पहले कभी कोई कीर्तन नहीं हुआ था, लेकिन इन लोगों ने कीर्तन शुरू करके और अकाल लाकर यहां सब कुछ बर्बाद कर दिया है।
 
“There was never any kirtan in this state before, but these people have ruined everything here by starting kirtan and bringing famine.
तात्पर्य
“इन लोगों ने हरि-कीर्तन शुरू करवाया, जो इस प्रांत में आज तक कभी सुना नहीं गया था, और भौतिकवादी लोगों के सुख-समृद्धि में बाधा पैदा की। इसके परिणाम स्वरूप अकाल पड़ा और साधारण लोगों का सुख हमेशा के लिए नष्ट हो गया।”

शब्द ‘चीरंतन’ उस वस्तु को कहते हैं जो अनादि काल से अविचल रूप में प्रचलित हो, जो परंपरागत हो या जो सदा से विद्यमान हो।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)