श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.8.24 
ক্ষণেকে গঙ্গার মাঝে এডেন সাঙ্তার
মহাস্রোতে লৈঽ যায, সন্তোষ অপার
क्षणेके गङ्गार माझे एडेन साङ्तार
महास्रोते लैऽ याय, सन्तोष अपार
 
 
अनुवाद
कभी वे गंगा में तैरते, तो कभी खुशी-खुशी उसकी धारा में बहते।
 
Sometimes they would swim in the Ganga, and sometimes they would happily flow in its current.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)