যতেক পাষণ্ডী-সব না পাইযা দ্বার
বাহিরে থাকিযা মন্দ বলযে অপার
কেহ বলে,—“এ-গুলা-সকল মাগিঽ খায
চিনিলে পাইবে লাজ দ্বার না ঘুচায”
यतेक पाषण्डी-सब ना पाइया द्वार
बाहिरे थाकिया मन्द बलये अपार
केह बले,—“ए-गुला-सकल मागिऽ खाय
चिनिले पाइबे लाज द्वार ना घुचाय”
अनुवाद
भौतिकवादी घर में घुस न पाने के कारण बाहर ही कठोर बातें करने लगे। किसी ने कहा, "ये लोग पेट भरने के लिए भीख मांगते हैं। इन्हें पहचाने जाने में शर्म आती है, इसलिए दरवाज़ा नहीं खोलते।"
Unable to enter the house, the materialists began to speak harshly outside. Someone said, "These people beg to feed themselves. They are ashamed to be recognized, so they don't open the door."
तात्पर्य
जो लोग श्रीवास के आंगन में प्रवेश नहीं कर पाए, वे कटु वचन बोलने लगे—''जो लोग भीतर प्रवेश किए हैं, वे भिक्षावृति करके अपना पालन-पोषण करते हैं। वे अपना दुखद जीवन दूसरों को दिखाने में लज्जा का अनुभव करते हैं, इसलिए उन्होंने द्वार बंद कर लिए हैं। यदि ऐसा नहीं होता, तो भूख की पीड़ा से व्याकुल होकर घर के भीतर वाले क्यों ऊंची-ऊंची पुकार लगाते?''
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥