श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 229
 
 
श्लोक  2.8.229 
প্রভুর আজ্ঞায দৃঢ লাগিযাছে দ্বার
প্রবেশিতে নারে লোক সব নদীযার
प्रभुर आज्ञाय दृढ लागियाछे द्वार
प्रवेशिते नारे लोक सब नदीयार
 
 
अनुवाद
प्रभु के आदेश से द्वार पर ताला लगा दिया गया था। नादिया के आम लोग अंदर नहीं जा सकते थे।
 
By the Lord's order, the gate was locked. The common people of Nadia could not enter.
तात्पर्य
लोक सब नदीयारा ("नादिया के सभी लोग") को एक और अर्थ प्रदान किया गया है, जो अर्थ है अन्य लोक नदीयारा, जिसका अर्थ है "नादिया के अन्य व्यक्ति।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)