श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 226
 
 
श्लोक  2.8.226 
এই-মত সবা দেখিঽ নানা-মত বলে
যেবা যেই বস্তু, তাহা প্রকাশযে ছলে
एइ-मत सबा देखिऽ नाना-मत बले
येबा येइ वस्तु, ताहा प्रकाशये छले
 
 
अनुवाद
इस प्रकार प्रभु ने विभिन्न तरीकों से उनके बारे में बोलकर उनकी वास्तविक पहचान प्रकट की।
 
Thus the Lord revealed their true identity by speaking about them in various ways.
तात्पर्य
अपने गौरा लीलाओं में शिरी गौरसुंदर ने अपने साथी जोनहे अपने पहले के लिलाओं में सहभागी थे, के पुराने नामों का आव्हान किया। ऐसा करके, उन्होंने अपने साथियों की पहचान का पता लगाया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)