श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 222
 
 
श्लोक  2.8.222 
কখনো দেখি যে অঙ্গ গুণ-দুই-তিন
কখনো স্বভাব হৈতে অতিশয ক্ষীণ
कखनो देखि ये अङ्ग गुण-दुइ-तिन
कखनो स्वभाव हैते अतिशय क्षीण
 
 
अनुवाद
कभी-कभी उनका शरीर आकार में दोगुना या तिगुना हो जाता था, और कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता था कि वह सिकुड़ गया है।
 
Sometimes his body would double or triple in size, and sometimes it would appear to have shrunk.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)