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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
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श्लोक 221
श्लोक
2.8.221
সেই অঙ্গ ক্ষণে ক্ষণে হেন-মত হয
অস্থিমাত্র নাহি যেন নবনীত-ময
सेइ अङ्ग क्षणे क्षणे हेन-मत हय
अस्थिमात्र नाहि येन नवनीत-मय
अनुवाद
कभी-कभी वही शरीर इस प्रकार शिथिल हो जाता है कि वह मक्खन की तरह नरम हो जाता है, हड्डियों के बिना।
Sometimes the same body relaxes in such a way that it becomes soft like butter, without bones.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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